यद्यप्यशीला नृपते प्राप्नुवन्ति श्रियं क्वचित् ।
न भुञ्जते चिरं तात समूलाश्च न सन्ति ते॥ ६९॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! यद्यपि कभी-कभी चरित्रहीन मनुष्य लक्ष्मी को प्राप्त कर लेते हैं, तथापि वे अधिक समय तक उनका उपभोग नहीं कर पाते और उनका सर्वथा नाश हो जाता है ॥69॥
O Lord of men! Although sometimes men without character attain the goddess Lakshmi, yet they are unable to enjoy her for long and they perish completely. ॥ 69॥