श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  12.124.65 
धृतराष्ट्र उवाच
सोपायं पूर्वमुद्दिष्टं प्रह्रादेन महात्मना।
संक्षेपेण तु शीलस्य शृणु प्राप्तिं नरेश्वर॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - "हे मनुष्यों! चरित्र का स्वरूप तथा उसकी प्राप्ति का उपाय - ये दोनों बातें महात्मा प्रह्लाद ने पहले ही कह दी हैं। मैं तुमसे चरित्र प्राप्ति का उपाय संक्षेप में कह रहा हूँ, ध्यानपूर्वक सुनो।"
 
Dhritarashtra said, "O Lord of men! The nature of character and the method of attaining it - both these things have already been told by Mahatma Prahlad. I am telling you briefly the method of attaining character, listen carefully. 65.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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