| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन » श्लोक 62 |
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| | | | श्लोक 12.124.62  | धर्म: सत्यं तथा वृत्तं बलं चैव तथाप्यहम्।
शीलमूला महाप्राज्ञ सदा नास्त्यत्र संशय:॥ ६२॥ | | | | | | अनुवाद | | हे महाज्ञानी! धर्म, सत्य, सदाचार, बल और मैं (लक्ष्मी) - ये सब सदाचार पर ही आश्रित हैं - सदाचार ही इन सबका मूल है। इसमें कोई संदेह नहीं है ॥ 62॥ | | | | O great wise one! Dharma, truth, good conduct, strength and I (Lakshmi) - all these always depend on morality - morality is the root of all these. There is no doubt in this. ॥ 62॥ | | ✨ ai-generated | | |
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