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श्लोक  12.124.61 
शीलेन हि त्रयो लोकास्त्वया धर्मज्ञ निर्जिता:।
तद्विज्ञाय सुरेन्द्रेण तव शीलं हृतं प्रभो॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म के ज्ञाता! आपने अपने चरित्र से तीनों लोकों पर विजय प्राप्त की है। हे प्रभु! यह जानकर ही सुरेन्द्र ने आपके चरित्र का अपहरण किया है। 61।
 
O knower of Dharma! You conquered the three worlds through your character. O Lord! Knowing this, Surendra has kidnapped your character. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)