श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 52-53h
 
 
श्लोक  12.124.52-53h 
को भवानिति पृष्टश्च तमाह स महाद्युति:॥ ५२॥
सत्यं विद्धॺसुरेन्द्राद्य प्रयास्ये धर्ममन्वहम्।
 
 
अनुवाद
तुम कौन हो?' पूछने पर उस महान् एवं तेजस्वी प्राणी ने उत्तर दिया - 'असुरेन्द्र! मुझे सत्य मानो! अब मैं धर्म का पालन करूँगा।'
 
When asked, 'Who are you?' that great and illustrious being replied to them - 'Asurendra! Consider me true! I will now follow Dharma.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas