Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.124.48: हे राजन! अब मैं उस निर्दोष और श्रेष्ठ ब्राह्मण के शरीर में निवास करूँगा, जो आपका शिष्य होकर प्रतिदिन यहाँ बड़ी सावधानी से रहता था।’ ॥48॥ | mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! अब मैं उस निर्दोष और श्रेष्ठ ब्राह्मण के शरीर में निवास करूँगा, जो आपका शिष्य होकर प्रतिदिन यहाँ बड़ी सावधानी से रहता था।’ ॥48॥
'O King, I will now reside in the body of that blameless and excellent Brahmin, who used to stay here every day with great care as your disciple.' ॥ 48॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥