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mahabharat 12.124.38: ब्राह्मण के मुख से शुक्राचार्य का नीतिपूर्ण कथन इस पृथ्वी पर अमृत है, यही सर्वश्रेष्ठ नेत्र है। राजा को इसे सुनना चाहिए और उसके अनुसार आचरण करना चाहिए। 38.   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.38 
एतत् पृथिव्याममृतमेतच्चक्षुरनुत्तमम्।
यद् ब्राह्मणमुखे काव्यमेतच्छ्रुत्वा प्रवर्तते॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण के मुख से शुक्राचार्य का नीतिपूर्ण कथन इस पृथ्वी पर अमृत है, यही सर्वश्रेष्ठ नेत्र है। राजा को इसे सुनना चाहिए और उसके अनुसार आचरण करना चाहिए। 38.
 
The moral saying of Shukracharya in the mouth of a Brahmin is the nectar on this earth, this is the best eye. The king should listen to this and act accordingly. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)