Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.124.37: मैं उनकी बुद्धिमत्ता का आनंद लेता हूं और जिस प्रकार चंद्रमा तारों पर शासन करता है, उसी प्रकार मैं भी अपने लोगों पर शासन करता हूं।   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  12.124.37 
सोऽहं वागग्रविद्यानां रसानामवलेहिता।
स्वजात्यानधितिष्ठामि नक्षत्राणीव चन्द्रमा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
मैं उनकी बुद्धिमत्ता का आनंद लेता हूं और जिस प्रकार चंद्रमा तारों पर शासन करता है, उसी प्रकार मैं भी अपने लोगों पर शासन करता हूं।
 
I enjoy the essence of their wisdom and, just as the moon rules over the stars, I too rule over my own people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)