श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.124.33 
पृष्टश्च तेन बहुश: प्राप्तं कथमनुत्तमम्।
त्रैलोक्यराज्यं धर्मज्ञ कारणं तद् ब्रवीहि मे।
प्रह्रादोऽपि महाराज ब्राह्मणं वाक्यमब्रवीत् ॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने प्रह्लाद से बार-बार पूछा - 'हे धर्म के ज्ञाता! आपको तीनों लोकों में यह श्रेष्ठ राज्य कैसे प्राप्त हुआ? इसका कारण मुझसे कहिए। महाराज! तब प्रह्लाद भी ब्राह्मण से इस प्रकार बोले -॥33॥
 
The Brahmin repeatedly asked Prahlad - 'O knower of religion! How did you get this best kingdom of the three worlds? Tell me the reason for this. Maharaj! Then Prahlad also spoke to the Brahmin in this manner -॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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