श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.124.29 
प्रह्रादस्त्वब्रवीद् विप्रं क्षणो नास्ति द्विजर्षभ।
त्रैलोक्यराज्यसक्तस्य ततो नोपदिशामि ते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
प्रह्लाद ने ब्राह्मण से कहा, 'हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! मैं त्रिलोकी के राज्य-कार्य में व्यस्त हूँ, इसलिए मेरे पास आपको सलाह देने का समय नहीं है।'
 
Prahlada said to the Brahmin, 'O best of Brahmins! I am busy with the administration of the kingdom of Triloki and hence I do not have time to give you advice.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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