श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.124.28 
स ततो ब्राह्मणो भूत्वा प्रह्रादं पाकशासन:।
गत्वा प्रोवाच मेधावी श्रेय इच्छामि वेदितुम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बुद्धिमान इन्द्र ब्राह्मण का रूप धारण करके प्रह्लाद के पास गए और बोले - 'राजन्! मैं श्रेय जानना चाहता हूँ ॥28॥
 
Thereafter, wise Indra took the form of a Brahmin and went to Prahlad and said – 'King! I want to know the credit. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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