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श्लोक  12.124.27 
भार्गवस्त्वाह सर्वज्ञ: प्रह्रादस्य महात्मन:।
ज्ञानमस्ति विशेषेणेत्युक्तो हृष्टश्च सोऽभवत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तब सर्वज्ञ शुक्राचार्य ने कहा, ‘महात्मा प्रह्लाद इससे भी बड़ा कल्याण जानते हैं।’ यह सुनकर इन्द्र बहुत प्रसन्न हुए।
 
Then the omniscient Shukracharya said, 'Mahatma Prahlada knows a greater good than this.' Hearing this, Indra became very pleased.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)