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mahabharat 12.124.25: तब अत्यंत तेजस्वी एवं महान तपस्वी इन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक शुक्राचार्य से अपने लिए श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त किया।   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.124.25 
आत्मनस्तु तत: श्रेयो भार्गवात् सुमहातपा:।
ज्ञानमागमयत् प्रीत्या पुन: स परमद्युति:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तब अत्यंत तेजस्वी एवं महान तपस्वी इन्द्र ने प्रसन्नतापूर्वक शुक्राचार्य से अपने लिए श्रेष्ठ ज्ञान प्राप्त किया।
 
Then the extremely brilliant and great ascetic Indra happily acquired the knowledge of what was best for himself from Shukracharya. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)