श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.124.24 
बृहस्पतिरुवाच
विशेषोऽस्ति महांस्तात भार्गवस्य महात्मन:।
अत्रागमय भद्रं ते भूय एव सुरर्षभ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
बृहस्पतिदेव बोले - तात! श्रेष्ठ! महात्मा शुक्राचार्य को इससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण बातों का ज्ञान है। तुम्हारा कल्याण हो। तुम उनके पास जाओ और पुनः उस बात का ज्ञान प्राप्त करो। 24॥
 
Jupiter said – Tat! Best! Mahatma Shukracharya has knowledge of even more important things. May you be well. You go to him and get the knowledge of that thing again. 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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