vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन
»
श्लोक 23
श्लोक
12.124.23
एतावच्छ्रेय इत्येव बृहस्पतिरभाषत।
इन्द्रस्तु भूय: पप्रच्छ को विशेषो भवेदिति॥ २३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् बृहस्पति ने कहा कि यही एकमात्र कल्याणकारी उपाय है। तब इन्द्र ने पुनः पूछा- 'इससे भी अधिक विशेष क्या है?'॥23॥
After that Brihaspati said that this is the only good (measure for welfare). Then Indra asked again- 'What is more special than this?'॥ 23॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas