श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.124.21 
ततो बृहस्पतिं शक्र: प्राञ्जलि: समुपस्थित:।
तमुवाच महाप्राज्ञ: श्रेय इच्छामि वेदितुम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तब महाज्ञानी इन्द्र हाथ जोड़कर बृहस्पतिजी की सेवा में उपस्थित हुए और उनसे बोले - 'प्रभो! मैं अपने कल्याण का उपाय जानना चाहता हूँ॥21॥
 
Then the great wise Indra appeared in the service of Brihaspatiji with folded hands and said to him - 'Lord! I want to know the solution for my welfare. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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