श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.124.19 
धृतराष्ट्र उवाच
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
नारदेन पुरा प्रोक्तं शीलमाश्रित्य भारत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले, 'हे भरतपुत्र! इस प्रसंग में एक प्राचीन कथा का उदाहरण दिया जाता है, जिसे नारद जी ने पहले नीति के प्रसंग में कहा था।
 
Dhritarashtra said, 'O son of Bharata! In this context an example of an ancient story is given, which Narada had earlier told in the context of morality.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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