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mahabharat 12.124.14: धृतराष्ट्र बोले - तात! पुरुषसिंह! पुत्र! यदि तुम युधिष्ठिर के समान अथवा उससे भी अधिक राजलक्ष्मी प्राप्त करना चाहते हो, तो विनम्र हो जाओ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.124.14 
धृतराष्ट्र उवाच
यदीच्छसि श्रियं तात यादृशी सा युधिष्ठिरे।
विशिष्टां वा नरव्याघ्र शीलवान् भव पुत्रक॥ १४॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र बोले - तात! पुरुषसिंह! पुत्र! यदि तुम युधिष्ठिर के समान अथवा उससे भी अधिक राजलक्ष्मी प्राप्त करना चाहते हो, तो विनम्र हो जाओ॥14॥
 
Dhritarashtra said – Tat! Purusha Singh! Son! If you want to get Rajlakshmi the same wealth as Yudhishthir has or even more than that, then become polite. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)