श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.124.11 
दुर्योधन उवाच
दश तानि सहस्राणि स्नातकानां महात्मनाम्।
भुञ्जते रुक्मपात्रीभिर्युधिष्ठिरनिवेशने॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा, "पिताश्री! युधिष्ठिर के महल में दस हजार महाबुद्धिमान स्नातक ब्राह्मण प्रतिदिन सोने की थालियों में भोजन करते हैं।"
 
Duryodhan said, "Father! In Yudhishthira's palace, ten thousand great-minded graduate Brahmins eat food on golden plates every day."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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