श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.124.10 
आच्छादयसि प्रावारानश्नासि पिशितौदनम्।
आजानेया वहन्त्यश्वा: केनासि हरिण: कृश:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
आप सुन्दर वस्त्र पहनते हैं, मछली खाते हैं और आपका रथ आजानेय घोड़ों (अरबी घोड़ों) द्वारा खींचा जाता है, फिर भी आप गोरे और पतले क्यों हो गए हैं?॥10॥
 
You wear fine clothes, eat fish and your chariot is drawn by 'Aajaaneya' horses (Arabian horses), then why do you become white and thin?॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas