श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 124: इन्द्र और प्रह्लादकी कथा—शीलका प्रभाव, शीलके अभावमें धर्म, सत्य, सदाचार, बल और लक्ष्मीके न रहनेका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.124.1 
युधिष्ठिर उवाच
इमे जना नरश्रेष्ठ प्रशंसन्ति सदा भुवि।
धर्मस्य शीलमेवादौ ततो मे संशयो महान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - नरश्रेष्ठ! पितामह! ये सभी लोग पृथ्वी पर सर्वप्रथम धर्मानुसार गुणों की प्रशंसा करते हैं। अतः मुझे इस विषय में बड़ा संदेह है। 1॥
 
Yudhishthir asked – Narashrestha! Grandfather! All these people on the earth first of all praise the virtues according to the religion. Therefore, I have great doubts about this matter. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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