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mahabharat 12.122.50: तदनन्तर ब्राह्मणों से दण्ड भोगने का अधिकार प्राप्त करके क्षत्रिय अपने धर्मानुसार सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करते हैं। यह सनातन चराचर जगत् क्षत्रियों से ही सुरक्षित है ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 12.122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 122: दण्डकी उत्पत्ति तथा उसके क्षत्रियोंके हाथमें आनेकी परम्पराका वर्णन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  12.122.50 
ब्राह्मणेभ्यश्च राजन्या लोकान् रक्षन्ति धर्मत:।
स्थावरं जङ्गमं चैव क्षत्रियेभ्य: सनातनम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर ब्राह्मणों से दण्ड भोगने का अधिकार प्राप्त करके क्षत्रिय अपने धर्मानुसार सम्पूर्ण जगत् की रक्षा करते हैं। यह सनातन चराचर जगत् क्षत्रियों से ही सुरक्षित है ॥50॥
 
Subsequently, after getting the right to bear the punishment from the Brahmins, the Kshatriyas protect the entire world as per their religion. This eternal pasture world has been safe only from the Kshatriyas. 50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)