श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.121.48 
ईश्वरेण प्रयत्नेन कारणात् क्षत्रियस्य च।
दण्डो दत्त: समानात्मा दण्डो हीदं सनातनम्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने धर्म की रक्षा के लिए क्षत्रिय को उसके समान जाति का दण्ड यत्नपूर्वक सौंप दिया है; अतः दण्ड ही इस सनातन व्यवहार का कारण है।
 
God has diligently handed over to the Kshatriya the punishment of his similar caste for the protection of Dharma; Therefore punishment is the reason for this eternal behaviour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)