श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 121: दण्डके स्वरूप, नाम, लक्षण, प्रभाव और प्रयोगका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.121.19 
भिन्दंश्छिन्दन्रुजन्कृन्तन्दारयन्पाटयंस्तथा।
घातयन्नभिधावंश्च दण्ड एव चरत्युत॥ १९॥
 
 
अनुवाद
वह अपराधियों को छेदता है, छुरा घोंपता है, पीड़ा देता है, काटता है, चीरता है, फाड़ता है और मार डालता है। इस प्रकार दण्ड सर्वत्र विचरण करता है॥19॥
 
He pierces, stabs, torments, cuts, rips, tears and kills the criminals. In this way, punishment roams everywhere.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)