| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 12.120.7  | नित्यं रक्षितमन्त्र: स्याद् यथा मूक: शरच्छिखी।
श्लक्ष्णाक्षरतनु: श्रीमान् भवेच्छास्त्रविशारद:॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | जैसे शरद ऋतु का मोर नहीं बोलता, उसी प्रकार राजा को भी चाहिए कि वह सदैव मौन रहकर अपने राज-भेदों की रक्षा करे। उसे मधुर वचन बोलने चाहिए, मृदु आचरण करना चाहिए, मनोहर होना चाहिए और शास्त्रों का विशेष ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। 7॥ | | | | Just as the autumn peacock does not speak, in the same way a king should always keep his royal secrets safe by remaining silent. He should speak sweet words, have a mild manner, be graceful and acquire special knowledge of the scriptures. 7॥ | | ✨ ai-generated | | |
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