|
| |
| |
श्लोक 12.120.51  |
विधिप्रयुक्तान् नरदेवधर्मा-
नुक्तान् समासेन निबोध बुद्धॺा।
इमान् विदध्याद् व्यतिसृत्य यो वै
राजा महीं पालयितुं स शक्त:॥ ५१॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| मैंने शास्त्रों में वर्णित राजा के कर्तव्यों का संक्षेप में वर्णन किया है। तुम बुद्धि से उन पर विचार करो और उन्हें हृदय में धारण करो। जो राजा उन्हें गुरु से सीखता है, हृदय में धारण करता है और उनका आचरण करता है, वही अपने राज्य की रक्षा करने में समर्थ है॥ 51॥ |
| |
| I have briefly described the duties of a king as prescribed in the scriptures. You should ponder over them with your intellect and imbibe them in your heart. Only the king who learns them from his Guru, imbibes them in his heart and practices them is capable of protecting his kingdom.॥ 51॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|