श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 120: राजधर्मका साररूपमें वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.120.42 
बुद्धिर्दीप्ता बलवन्तं हिनस्ति
बलं बुद्धॺा पाल्यते वर्धमानम्।
शत्रुर्बुद्धॺा सीदते वर्धमानो
बुद्धे: पश्चात् कर्म यत्तत् प्रशस्तम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
प्रखर बुद्धि बलवानों को भी परास्त कर देती है। बुद्धि से नष्ट होने वाला बल भी सुरक्षित हो जाता है। बढ़ता हुआ शत्रु भी बुद्धि से पराजित होकर कष्ट सहने लगता है। बुद्धि से विचार करके किया गया कर्म श्रेष्ठ है।॥ 42॥
 
A brilliant intellect defeats even the strongest. Even the strength that is being destroyed by intellect is protected. Even a growing enemy is defeated by intellect and starts suffering. The action that is done after thinking with intellect is the best.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)