श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 119: सेवकोंको उनके योग्य स्थानपर नियुक्त करने, कुलीन और सत्पुरुषोंका संग्रह करने, कोष बढ़ाने तथा सबकी देखभाल करनेके लिये राजाको प्रेरणा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.119.2 
न श्वा स्वं स्थानमुत्क्रम्य प्रमाणमभिसत्कृत:।
आरोप्य: श्वा स्वकात्स्थानादुत्क्रम्यान्यत् प्रमाद्यति॥ २॥
 
 
अनुवाद
पूर्व वर्णित इतिहास से सिद्ध होता है कि यदि कुत्ता अपना स्थान छोड़कर ऊपर चढ़ जाए, तो वह न तो विश्वास के योग्य होता है और न ही उसका कभी सम्मान होता है। कुत्ते को उसके स्थान से उठाकर कभी ऊँचा न बैठाएँ; क्योंकि वह किसी अन्य ऊँचे स्थान पर चढ़कर लापरवाही करने लगता है (इसी प्रकार यदि किसी नीच जाति के व्यक्ति को उसकी योग्यता और मर्यादा से ऊँचा स्थान मिल जाए, तो वह अहंकार के कारण उद्दण्ड हो जाता है)।॥2॥
 
The history mentioned earlier proves that if a dog leaves its place and climbs up, it is neither worthy of trust nor is it ever respected. Never lift a dog from its place and make it sit up high; because it climbs up to some other high place and starts committing negligence (similarly if a person from a low caste gets a place higher than his qualification and dignity, he becomes unruly due to arrogance).॥2॥
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