भीष्म उवाच
एवं गुणयुतान् भृत्यान् स्वे स्वे स्थाने नराधिप:।
नियोजयति कृत्येषु स राज्यफलमश्नुते॥ १॥
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - युधिष्ठिर! इस प्रकार जो राजा योग्य सेवकों को उनके स्थान पर नियुक्त करके उन्हें काम पर लगाता है, वही राज्य का वास्तविक फल पाता है।
Bhishmaji says – Yudhishthir! In this way, the king who appoints capable servants in their respective places and puts them to work, gets the real fruits of the kingdom.