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mahabharat 12.118.d5: पूर्वकाल में मनुजी ने पुरुषार्थ, दैव और दोनों के विविध प्रकारों का वर्णन किया था। मैं तुम्हें वह बताता हूँ, सुनो।   |   mahabharat अध्याय 12.118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.118.d5 
उत्थानं चैव दैवं च तयोर्नानात्वमेव च।
मनुना वर्णितं पूर्वं वक्ष्ये शृणु तदेव हि॥
 
 
अनुवाद
पूर्वकाल में मनुजी ने पुरुषार्थ, दैव और दोनों के विविध प्रकारों का वर्णन किया था। मैं तुम्हें वह बताता हूँ, सुनो।
 
In the past Manuji had described Purushaarth, Daiva and the various types of both. I will tell you about that, listen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)