Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.118.27: जो राजा सदैव सब से धन इकट्ठा करने में लगा रहता है, परिश्रमी है और मित्रों से संपन्न है, वह सभी राजाओं में श्रेष्ठ है।   |   mahabharat अध्याय 12.118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  12.118.27 
सर्वसंग्रहणे युक्तो नृपो भवति य: सदा।
उत्थानशीलो मित्राढॺ: स राजा राजसत्तम:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो राजा सदैव सब से धन इकट्ठा करने में लगा रहता है, परिश्रमी है और मित्रों से संपन्न है, वह सभी राजाओं में श्रेष्ठ है।
 
The king who is always engaged in collecting wealth from everyone, is industrious and is blessed with friends is the best of all kings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)