श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.118.15 
सचिवं य: प्रकुरुते न चैनमवमन्यते।
तस्य विस्तीर्यते राज्यं ज्योत्स्ना ग्रहपतेरिव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो राजा ऐसे योग्य व्यक्ति को अपना सचिव नियुक्त करता है और कभी उसका अनादर नहीं करता, उसका राज्य चन्द्रमा के प्रकाश की भाँति सब दिशाओं में फैल जाता है ॥15॥
 
The king who appoints such a capable person as his secretary and never disrespects him, his kingdom spreads in all directions like the light of the moon. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)