श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 118: राजाके सेवक, सचिव तथा सेनापति आदि और राजाके उत्तम गुणोंका वर्णन एवं उनसे लाभ  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.118.1 
भीष्म उवाच
स श्वा प्रकृतिमापन्न: परं दैन्यमुपागत:।
ऋषिणा हुङ्कृत: पापस्तपोवनबहिष्कृत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं- हे राजन! इस प्रकार वह कुत्ता उनके गर्भ में आकर बड़ी दयनीय स्थिति में पहुँच गया। ऋषि ने गर्जना करके उस पापी को आश्रम से बाहर निकाल दिया।
 
Bhishmaji says- O King! In this way, the dog reached a very pitiable condition after coming into his womb. The sage roared and drove the sinner out of the hermitage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)