| श्री महाभारत » पर्व 12: शान्ति पर्व » अध्याय 117: कुत्तेका शरभकी योनिमें जाकर महर्षिके शापसे पुन: कुत्ता हो जाना » श्लोक 20-21 |
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| | | | श्लोक 12.117.20-21  | श्वा त्वं द्वीपित्वमापन्नो द्वीपीव्याघ्रत्वमागत:॥ २०॥
व्याघ्रान्नागो मदपटुर्नाग: सिंहत्वमागत:।
सिंहस्त्वं बलमापन्नो भूय: शरभतां गत:॥ २१॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘अरे ! पहले तू कुत्ता था, फिर चीता हुआ, चीते से तूने बाघ का रूप धारण किया, बाघ से तू उन्मत्त हाथी हुआ, हाथी से तूने सिंह का रूप धारण किया, शक्तिशाली सिंह होकर तूने पुनः शरभ का शरीर प्राप्त किया ॥ 20-21॥ | | | | ‘Hey! First you were a dog, then you became a leopard, from leopard you took the form of a tiger, from tiger you became a mad elephant, from elephant you took the form of a lion, being a powerful lion you again got the body of Sharabha.॥ 20-21॥ | | ✨ ai-generated | | |
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