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mahabharat 12.116.8: सभी जानवर आते और ऋषि का कुशलक्षेम पूछकर लौट जाते; किन्तु गांव का एक भी कुत्ता ऋषि को वहां छोड़कर कहीं नहीं जाता था।   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.116.8 
दत्त्वा च ते सुखप्रश्नं सर्वे यान्ति यथागतम्।
ग्राम्यस्त्वेक: पशुस्तत्रनाजहात् स महामुनिम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सभी जानवर आते और ऋषि का कुशलक्षेम पूछकर लौट जाते; किन्तु गांव का एक भी कुत्ता ऋषि को वहां छोड़कर कहीं नहीं जाता था।
 
All the animals came and returned after inquiring about the well-being of the sage; however, a village dog never left the great sage there and went anywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)