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mahabharat 12.116.7: यद्यपि वे सब-के-सब मांसाहारी और क्रूर पशु थे, फिर भी वे मुनि के पास उनके शिष्यों की भाँति सिर झुकाकर बैठते थे, उनका कुशल-क्षेम पूछते थे और उनसे सदैव प्रेम करते थे ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.116.7 
ते सुखप्रश्नदा: सर्वे भवन्ति क्षतजाशना:।
तस्यर्षे: शिष्यवच्चैव न्यग्भूता: प्रियकारिण:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि वे सब-के-सब मांसाहारी और क्रूर पशु थे, फिर भी वे मुनि के पास उनके शिष्यों की भाँति सिर झुकाकर बैठते थे, उनका कुशल-क्षेम पूछते थे और उनसे सदैव प्रेम करते थे ॥7॥
 
Though all of them were carnivorous ferocious animals, yet they used to sit near the sage with their heads bent down like his disciples, used to inquire about his well-being and health and used to always love him. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)