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mahabharat 12.116.5: एक स्थान पर बैठे हुए उस ज्ञानी ऋषि की सद्भावना देखकर सभी वन प्राणी उनके पास आते थे।   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.116.5 
तस्य संदृश्य सद्भावमुपविष्टस्य धीमत:।
सर्वे सत्त्वा: समीपस्था भवन्ति वनचारिण:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
एक स्थान पर बैठे हुए उस ज्ञानी ऋषि की सद्भावना देखकर सभी वन प्राणी उनके पास आते थे।
 
Seeing the goodwill of that wise sage sitting in one place, all the forest animals used to come near him. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)