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mahabharat 12.116.21: फिर, सहवास से उत्पन्न महान स्नेह का प्रयोग करते हुए, ऋषि ने तेंदुए को बाघ में बदल दिया। अब तेंदुआ अपने शत्रुओं के लिए अत्यंत शक्तिशाली हो गया।   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.116.21 
संवासजं परं स्नेहमृषिणा कुर्वता तदा।
स द्वीपी व्याघ्रतां नीतो रिपूणां बलवत्तर:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
फिर, सहवास से उत्पन्न महान स्नेह का प्रयोग करते हुए, ऋषि ने तेंदुए को बाघ में बदल दिया। अब तेंदुआ अपने शत्रुओं के लिए अत्यंत शक्तिशाली हो गया।
 
Then, exercising the great affection born of cohabitation, the sage transformed the leopard into a tiger. Now the leopard became very powerful for its enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)