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mahabharat 12.116.11: तत्पश्चात् एक दिन एक महाबली रक्तभक्षी चीता अत्यंत प्रसन्न होकर क्रूर मृत्यु और यमराज के समान उस कुत्ते को पकड़ने के लिए वहाँ आया ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 12.116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 116: सज्जनोंके चरित्रके विषयमें दृष्टान्तरूपसे एक महर्षि और कुत्तेकी कथा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.116.11 
ततोऽभ्ययान्महावीर्यो द्वीपी क्षतजभोजन:।
स्वार्थमत्यन्तसंतुष्ट: क्रूरकाल इवान्तक:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् एक दिन एक महाबली रक्तभक्षी चीता अत्यंत प्रसन्न होकर क्रूर मृत्यु और यमराज के समान उस कुत्ते को पकड़ने के लिए वहाँ आया ॥11॥
 
Thereafter one day a mighty blood-eating leopard became very happy and came there like the cruel death and Yamaraja to catch that dog. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)