अभिषिक्तो हि यो राजा राष्ट्रस्थो मित्रसंवृत:।
ससुहृत्समुपेतो वा स कथं रञ्जयेत् प्रजा:॥ ५॥
अनुवाद
जो राजा सिंहासन पर विराजमान है, देश में मित्रों से घिरा हुआ है और जो हितैषी मित्रों से भी संपन्न है, वह अपनी प्रजा को कैसे सुखी रख सकता है? ॥5॥
How can a king, who is anointed on his throne and is surrounded by friends in the country and who is also blessed with well-wishing friends, keep his subjects happy? ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥