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mahabharat 12.115.21: यदि कोई व्यक्ति लोभ से विभक्त न हो, विश्वासपात्र, संग्रहकर्ता, सुपात्र और लोभरहित होकर अन्न की रक्षा करने में तत्पर रहता है, तो उसे विशेष उन्नति प्राप्त होती है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.115: राजा तथा राजसेवकोंके आवश्यक गुण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 115: राजा तथा राजसेवकोंके आवश्यक गुण  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.115.21 
कोष्ठागारमसंहार्यैराप्तै: संचयतत्परै:।
पात्रभूतैरलुब्धैश्च पाल्यमानं गुणी भवेत् ॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति लोभ से विभक्त न हो, विश्वासपात्र, संग्रहकर्ता, सुपात्र और लोभरहित होकर अन्न की रक्षा करने में तत्पर रहता है, तो उसे विशेष उन्नति प्राप्त होती है ॥21॥
 
If a person who is not divided by greed, trustworthy, hoarder, worthy and greedless is ready to protect the food grains, then he gets special progress. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)