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mahabharat 12.114.4: अच्छे मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी निन्दा करने वाले, रोने वाले, बालू के समान या रोगी की भाँति उस व्यक्ति की उपेक्षा करे। ऐसा करने से वह सब लोगों की घृणा का पात्र बनेगा और उसके सारे अच्छे कर्म निष्फल हो जाएँगे। ॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.114.4 
टिट्टिभं तमुपेक्षेत वाशमानमिवातुरम्।
लोकविद्वेषमापन्नो निष्फलं प्रतिपद्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अच्छे मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी निन्दा करने वाले, रोने वाले, बालू के समान या रोगी की भाँति उस व्यक्ति की उपेक्षा करे। ऐसा करने से वह सब लोगों की घृणा का पात्र बनेगा और उसके सारे अच्छे कर्म निष्फल हो जाएँगे। ॥4॥
 
A good man should ignore the person who is criticizing him, wailing like a sandpiper or a sick man. By doing this he will become the object of hatred of all people and all his good deeds will become futile. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)