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mahabharat 12.114.14: अतः बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि ऐसे पापमय विचार वाले व्यक्ति का तुरन्त त्याग कर दे। वह ऋषियों के लिए सदैव कुत्ते के मांस के समान त्यागा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.114.14 
तस्मात् प्राज्ञो नर: सद्यस्तादृशं पापचेतसम्।
वर्जयेत् साधुभिर्वर्ज्यं सारमेयामिषं यथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
अतः बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि ऐसे पापमय विचार वाले व्यक्ति का तुरन्त त्याग कर दे। वह ऋषियों के लिए सदैव कुत्ते के मांस के समान त्यागा जाता है।
 
Therefore, an intelligent person should immediately abandon a person with such sinful thoughts. It is always sacrificed for sages like dog's meat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)