श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 114: दुष्ट मनुष्यद्वारा की हुई निन्दाको सह लेनेसे लाभ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.114.11 
यस्यावाच्यं न लोकेऽस्ति नाकार्यं चापि किंचन।
वाचं तेन न संदध्याच्छुचि: संश्लिष्टकर्मणा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो सज्जन पुरुष अपने अच्छे कर्मों से पवित्र माना जाता है, उसे ऐसे व्यक्ति से बात भी नहीं करनी चाहिए जिसके लिए इस संसार में कुछ भी कहना या करना असम्भव न हो ॥11॥
 
A good man who is considered pure by his good deeds should not even talk to such a person for whom it is not impossible to say or do anything in this world. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)