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mahabharat 12.113.12: भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! इसी प्रकार जो राजा बल में श्रेष्ठ तथा बंदी बनाने और नष्ट करने में समर्थ शत्रु के पहले आक्रमण का सामना करने के लिए सिर नहीं झुकाता, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है॥12॥   |   mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.113.12 
भीष्म उवाच
यो हि शत्रोर्विवृद्धस्य प्रभोर्बन्धविनाशने।
पूर्वं न सहते वेगं क्षिप्रमेव विनश्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर! इसी प्रकार जो राजा बल में श्रेष्ठ तथा बंदी बनाने और नष्ट करने में समर्थ शत्रु के पहले आक्रमण का सामना करने के लिए सिर नहीं झुकाता, वह शीघ्र ही नष्ट हो जाता है॥12॥
 
Bhishma says - Yudhishthira! Similarly, a king who does not bow his head and face the first attack of an enemy who is superior in power and capable of capturing and destroying, is soon destroyed. ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)