Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.113.10: बेंत समय को जानता है, उसके अनुसार आचरण करना जानता है, सदैव हमारे वश में रहता है, कभी अहंकार नहीं करता और अनुकूल रहता है। वह कभी अहंकारी नहीं होता; इसीलिए उसे अपना स्थान छोड़कर यहाँ आना नहीं पड़ता॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.113: शक्तिशाली शत्रुके सामने बेंतकी भाँति नतमस्तक होनेका उपदेश—सरिताओं और समुद्रका संवाद । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कालज्ञ: समयज्ञश्च सदा वश्यश्च नोद्धत:।
अनुलोमस्तथास्तब्धस्तेन नाभ्येति वेतस:॥ १०॥
अनुवाद
बेंत समय को जानता है, उसके अनुसार आचरण करना जानता है, सदैव हमारे वश में रहता है, कभी अहंकार नहीं करता और अनुकूल रहता है। वह कभी अहंकारी नहीं होता; इसीलिए उसे अपना स्थान छोड़कर यहाँ आना नहीं पड़ता॥10॥
The cane knows the time, knows how to behave accordingly, is always under our control, never shows arrogance and remains favorable. It never becomes arrogant; that is why it does not have to leave its place and come here.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥