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mahabharat 12.112.7: वरदानदाता ब्रह्माजी ने 'ऐसा ही हो' कहकर उसे उसका इच्छित वरदान दे दिया। उत्तम वरदान पाकर ऊँट अपने वन में वापस चला गया।   |   mahabharat अध्याय 12.112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 112: एक तपस्वी ऊँटके आलस्यका कुपरिणाम और राजाका कर्तव्य  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.112.7 
एवमस्त्विति चोक्त: स वरदेन महात्मना।
प्रतिलभ्य वरं श्रेष्ठं ययावुष्ट्र: स्वकं वनम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वरदानदाता ब्रह्माजी ने 'ऐसा ही हो' कहकर उसे उसका इच्छित वरदान दे दिया। उत्तम वरदान पाकर ऊँट अपने वन में वापस चला गया।
 
The boon-giver Brahmaji said 'So be it' and granted him his desired boon. After getting the best boon, the camel went back to his forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)