Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.111.90: वह बहुत बुद्धिमान था, इसलिए उसने सिंह की विनती पर ध्यान न देते हुए, मृत्युपर्यन्त निराहार रहने का संकल्प लिया और एक स्थान पर बैठ गया तथा अंततः शरीर त्यागकर स्वर्ग पहुंच गया। | mahabharat अध्याय 12.111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वह बहुत बुद्धिमान था, इसलिए उसने सिंह की विनती पर ध्यान न देते हुए, मृत्युपर्यन्त निराहार रहने का संकल्प लिया और एक स्थान पर बैठ गया तथा अंततः शरीर त्यागकर स्वर्ग पहुंच गया।
He was very intelligent; therefore, instead of heeding the lion's entreaties, he took a vow to remain without any food till his death and sat in one place and finally, after giving up his body, he reached heaven.
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि व्याघ्रगोमायुसंवादे एकादशाधिकशततमोऽध्याय:॥ १११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें व्याघ्र और गीदड़का संवादविषयक एक सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १११॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ९१ श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥