श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  12.111.88 
अकस्मात् प्रक्रिया नॄणामकस्माच्चापकर्षणम्।
शुभाशुभे महत्त्वं च प्रकर्तुं बुद्धिलाघवम्॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य का उत्थान और पतन (उन्नति और अवनति) अचानक ही होता है। किसी का भला करके उसके साथ बुरा करना, उसे महत्व देना और फिर उसे नीचे गिरा देना, यह सब ऊपरी बुद्धि का ही परिणाम है।॥88॥
 
‘Man's rise and fall (progress and decline) happen suddenly. Doing bad to someone after doing good to him, giving importance to him and then bringing him down, all this is the result of superficial intellect.'॥ 88॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)