श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 111: मनुष्यके स्वभावकी पहचान बतानेवाली बाघ और सियारकी कथा  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.111.82 
प्रथमं य: समाख्यात: शीलवानिति संसदि।
न वाच्यं तस्य वैगुण्यं प्रतिज्ञां परिरक्षता॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति अपनी प्रतिज्ञा का पालन करने वाला हो, उसे चाहिए कि वह उस व्यक्ति के दोष न बताए जो सभा में पहले ही अच्छे चरित्र वाला बताया गया हो ॥ 82॥
 
'A person who is going to keep his promise should not point out the faults of a person who has been first introduced in a gathering as a man of good character. ॥ 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)